PESA Act 1996: 243-M का संवैधानिक संघर्ष, दिलीप भूरिया समिति और चुनाव की सरकारी मंशा
भूमिका (Introduction):
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 243-M अनुसूचित क्षेत्रों को सामान्य पंचायत व्यवस्था से बाहर रखता है। 1992 के 73वें संविधान संशोधन के बाद, केंद्र सरकार और राज्यों के सामने यह चुनौती थी कि वे इन क्षेत्रों में अपना प्रशासनिक नियंत्रण कैसे स्थापित करें। सरकार की स्पष्ट मंशा थी कि अनुसूचित क्षेत्रों में भी सामान्य चुनाव करवाकर अपनी ‘पंचायत’ का ढांचा थोपा जाए। इसी सरकारी दबाव के बीच दिलीप भूरिया समिति का गठन हुआ, ताकि संवैधानिक गतिरोध को दूर किया जा सके।
1. 243-M और चुनाव करवाने की सरकारी मंशा:
सरकार अनुच्छेद 243-M का उपयोग केवल आदिवासियों को सुरक्षा देने के लिए नहीं, बल्कि एक ‘वैधानिक बहाना’ बनाकर उन्हें मुख्यधारा की राजनीति में खींचने के लिए कर रही थी।
- सत्ता का केंद्रीकरण: सरकार चाहती थी कि अनुसूचित क्षेत्रों में चुनाव हों ताकि राज्य सरकार का प्रभाव गांव की सत्ता तक पहुंच सके।
- संवैधानिक शून्य: 243-M ने कहा कि पंचायतें लागू नहीं होंगी, लेकिन सरकार ने अपनी मंशा के अनुसार पेसा कानून के माध्यम से उन शक्तियों को ‘पंचायत’ के ढांचे में ही पिरोने की कोशिश की, ताकि आदिवासी स्वशासन, सरकारी चुनावी प्रणाली के अधीन रहे।
2. दिलीप भूरिया समिति और PESA का गठन:
सांसद दिलीप भूरिया की अध्यक्षता में बनी समिति ने सरकार की चुनावी मंशा और आदिवासियों के पारंपरिक स्वशासन के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास किया।
- समिति का रुख: दिलीप भूरिया समिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि अनुसूचित क्षेत्रों में चुनाव केवल ‘सरपंच’ चुनने के लिए नहीं, बल्कि ग्राम सभा की शक्ति को संवैधानिक मान्यता देने के लिए होने चाहिए।
- PESA का उद्देश्य: सरकार की चुनावी मंशा को कानूनी रूप देकर, ग्राम सभा को चुनाव की प्रक्रिया के साथ जोड़ना ताकि वे ‘राज्य’ के एक अंग की तरह काम करें, न कि स्वतंत्र इकाई के रूप में।
- “आरक्षण की विस्तृत जानकारी“
| धारा | विषय | कानूनी महत्व |
|---|---|---|
| धारा 4(a) | रूढ़ि और प्रथा | ग्राम सभा की विधायी शक्ति को पारंपरिक कानूनों के साथ जोड़ना। |
| धारा 4(d) | सामाजिक संसाधनों पर नियंत्रण | जल, जंगल, जमीन पर ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य। |
| धारा 4(i) | गौण खनिजों पर स्वामित्व | खदानों के पट्टे के लिए ग्राम सभा की सिफारिश का होना। |
| धारा 4(j) | साहूकारी व नशाबंदी | ग्राम सभा को अनैतिक व्यापार और शोषण को रोकने की शक्ति। |
4. निष्कर्ष:
PESA कानून आज भी एक दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ यह अनुच्छेद 243-M का सुरक्षा कवच है, तो दूसरी तरफ सरकार द्वारा चुनाव के माध्यम से थोपी गई प्रशासनिक व्यवस्था। असल स्वायत्तता तभी संभव है जब ग्राम सभा, चुनावी राजनीति के प्रभाव से मुक्त होकर 243-M के मूल सिद्धांतों का पालन करे।
PESA Act 1996: आधिकारिक दस्तावेज़ (Download & Verify)
PESA kanoon ke sahi aur pramannik jankari ke liye neeche diye gaye sarkari link ka upyog karein:
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1. Mool Adhiniyam (Original Act – English):
PESA Act 1996 – Official PDF (Govt. Portal) -
2. PESA Adhiniyam (Hindi PDF):
PESA Act 1996 – Hindi PDF (Download) -
3. PESA Niyam (Madhya Pradesh Hindi):
MP PESA Niyam 2022 – Hindi PDF
Note: Yeh sabhi link sarkari portals se liye gaye hain taaki aapko sahi jankari mile.
