आदिवासी सत्ता का नया सूर्य: भारत आदिवासी पार्टी (BAP) और राज्यसभा की दहलीज
जोहार साथियों!
”Kamleshwar Dodiyar का सीधा ऐलान: भारत आदिवासी पार्टी (BAP) अब मध्य प्रदेश से राज्यसभा में आदिवासियों की दहाड़ बुलंद करेगी! सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब समाज का हक संसद के उच्च सदन में गूँजेगा। देखिए विधायक कमलेश्वर डोडियार का खुद का यह धमाकेदार वीडियो, जिसमें उन्होंने इस ऐतिहासिक कदम की घोषणा की है।”
आज विंध्य से लेकर अरावली तक और सतपुड़ा के घने जंगलों से लेकर दिल्ली की संसद तक एक ही गूँज सुनाई दे रही है— ‘अबुआ डिशुम, अबुआ राज’। वह दौर चला गया जब हम सिर्फ वोट बैंक थे। आज का आदिवासी युवा जाग चुका है, वह अपने संवैधानिक अधिकारों को पहचानता है और अब वह अपनी किस्मत का फैसला खुद करने के लिए तैयार है।
मध्य प्रदेश की राजनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर निकलकर आ रही है जिसने स्थापित राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार भेजने जा रही है। यह केवल एक सीट की लड़ाई नहीं है, यह उस 8% मालिकाना हक की गूँज है जिसे 5 जनवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया था।
1. कमलेश्वर डोडियार का बड़ा ऐलान: “हम लड़ेंगे राज्यसभा”
हाल ही में एक वायरल वीडियो में विधायक कमलेश्वर डोडियार ने घोषणा की है कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटें खाली हो रही हैं और BAP एक सीट पर अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि यदि ये दल वास्तव में आदिवासियों के हितैषी हैं, तो उन्हें आदिवासी समाज की आवाज़ को संसद के उच्च सदन तक पहुँचाने में मदद करनी चाहिए।
यहाँ देखें कमलेश्वर डोडियार का पूरा बयान और उनका वायरल शॉर्ट्स वीडियो।
2. राज्यसभा जाने का ‘राजनीतिक गणित’
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 58 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है। हालांकि BAP के पास वर्तमान में एक विधायक (कमलेश्वर डोडियार) है, लेकिन वे अन्य आदिवासी विधायकों और जयस समर्थित नेताओं से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। डोडियार का तर्क है कि आदिवासियों की अपनी स्वतंत्र आवाज़ राज्यसभा में होनी चाहिए ताकि अनुच्छेद 244(1) जैसे मुद्दों पर मजबूती से बात रखी जा सके।
3. भारत आदिवासी पार्टी (BAP): एक विचारधारा का उदय
BAP केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है। भील प्रदेश की मांग से लेकर आदिवासियों के लिए अलग ‘धर्म कोड’ तक, इस पार्टी ने वह मुद्दे उठाए हैं जिन्हें मुख्यधारा की पार्टियों ने दशकों तक दबाए रखा। आज राजकुमार रोत के नेतृत्व में यह पार्टी राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के ट्राईबल बेल्ट में पहली पसंद बन चुकी है।
4. राजकुमार रोत: आदिवासियों की नई बुलंद आवाज़
जब हम BAP की बात करते हैं, तो राजकुमार रोत का नाम सबसे ऊपर आता है। उनके भाषणों ने न केवल युवाओं में जोश भरा है, बल्कि संसद के पटल पर भी आदिवासियों की समस्याओं को बेबाकी से रखा है। राजकुमार रोत का ‘जोहार’ केवल एक अभिवादन नहीं, बल्कि हक की लड़ाई का आह्वान बन चुका है। अब यही आवाज़ राज्यसभा के जरिए उच्च सदन में गूंजने को तैयार है।
5. अनुच्छेद 244(1) और स्वशासन की आवाज़
राज्यसभा जाने का असली मकसद कुर्सी नहीं, बल्कि अनुच्छेद 244(1) के तहत मिली स्वशासन की शक्तियों को संवैधानिक रूप से लागू करवाना है। 5वीं अनुसूची के प्रावधानों और ग्राम सभा की शक्तियों को जब तक संसद में सही ढंग से नहीं उठाया जाएगा, तब तक आदिवासियों का पूर्ण विकास संभव नहीं है।
6. 5 जनवरी 2011 का ऐतिहासिक फैसला और मालिकाना हक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि इस देश के असली मालिक 8% आदिवासी ही हैं। राज्यसभा में BAP का प्रतिनिधित्व इसी मालिकाना हक की कानूनी मुहर होगी। यह लड़ाई जमीन की नहीं, बल्कि उस आत्मसम्मान की है जो संविधान ने हमें दी है।
7. जयपाल सिंह मुंडा का वो अधूरा सपना
संविधान सभा में जयपाल सिंह मुंडा ने कहा था कि आदिवासियों को लोकतंत्र सिखाने की जरूरत नहीं है। आज कमलेश्वर डोडियार उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। राज्यसभा में आदिवासियों का अपना नेता होने का मतलब है कि अब हमारे फैसले दिल्ली के बंद कमरों में नहीं, बल्कि समाज के बीच होंगे।
8. आदिवासी धर्म कोड और पहचान का मुद्दा
राजनीति के साथ-साथ आदिवासी धर्म कोड की मांग भी राज्यसभा में उठनी जरूरी है। BAP का मानना है कि आदिवासियों की अपनी अलग पहचान, अपनी संस्कृति और अपना धर्म है, जिसे जनगणना में अलग कॉलम मिलना ही चाहिए।
9. सिंधु राष्ट्र से भारत के इतिहास तक का सफर
इतिहास गवाह है कि सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर आज तक, आदिवासियों ने ही इस देश की संस्कृति को बचाए रखा है। मध्य प्रदेश में BAP का राज्यसभा प्रत्याशी इसी गौरवशाली इतिहास को आधुनिक भारत की राजनीति से जोड़ने की एक कड़ी है।
10 मुख्य बिंदु
- BAP विधायक कमलेश्वर डोडियार ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार उतारने का औपचारिक ऐलान किया है।
- उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस से आदिवासी प्रतिनिधित्व के नाम पर समर्थन मांगा है।
- राज्यसभा जाने का मुख्य उद्देश्य 5वीं अनुसूची और पेसा कानून को प्रभावी बनाना है।
- राजकुमार रोत के नेतृत्व में BAP आदिवासियों की स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति बन गई है।
- सुप्रीम कोर्ट का 8% मालिकाना हक वाला फैसला पार्टी की मुख्य वैचारिक नींव है।
- अनुच्छेद 244(1) के तहत ग्राम सभा के अधिकारों की सुरक्षा प्राथमिकता है।
- आदिवासी धर्म कोड को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश।
- जयपाल सिंह मुंडा के संवैधानिक विजन को आगे बढ़ाना।
- युवा नेतृत्व और सोशल मीडिया के जरिए आदिवासी समाज की एकजुटता।
- राज्यसभा चुनाव का यह मोड़ मध्य प्रदेश की राजनीति में दूरगामी परिणाम लाएगा।