👉 📚 पूरा आर्टिकल एक नजर में
- 1 भूमिका – ये जमीन हमारी है
- 2 1.मूल मलिक कौन? अंग्रेजों के समय के कानून – जब गोरे भी मानते थे आदिवासी (मूल निवासी)
- 3 2.जब बलिदानों से बने कानून – बिरसा मुंडा, टंट्या भील और CNT/SPT एक्ट
- 4 📊 जमीन रक्षा का पूरा कानूनी हथियार – एक नजर में
- 5 3.आजादी के बाद आदिवासियों (मूल निवासी) के साथ कैसा व्यवहार?
- 6 📊 विस्थापन की स्थिति में 7-स्टेप एक्शन प्लान
- 7 4.राहुल गांधी ने भी माना – आदिवासी भारत के असली मालिक
- 8 5.संविधान में आदिवासियों (प्राकृतिक समुदाय) के लिए क्या है?
- 9 6.सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक जजमेंट – जो आदिवासी की जीत हैं
- 10 📊 सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट – आदिवासी की जीत का इतिहास
- 11 7.PESA Act 1996 – ग्राम सभा की वीटो पावर
- 12 📊 ग्राम सभा की अनुमति – कब, कैसे, क्यों जरूरी?
- 13 8.अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 – जंगल के मूल निवासी का हक
- 14 9.ST प्रमाण पत्र – कानूनी पहचान का पहला दरवाजा
- 15 10.आज आप (मूल मलिक) क्या कर सकते हैं? – 7 कदम
- 16 निष्कर्ष – यह लेख हर मूल मलिक के लिए हथियार है
- 17 📌 ये भी पढ़ें – आपकी जमीन और हक से जुड़ी हर जरूरी बात
भूमिका – ये जमीन हमारी है
आपने कभी सोचा है कि मूल मलिक कौन? प्राकृतिक समुदाय (Indigenous People) को ही बार-बार अपनी जमीन से क्यों उखाड़ा जाता है?
डैम हो, माइनिंग हो, इंडस्ट्री हो, रेलवे ट्रैक हो – जहाँ भी विकास का नाम लिया जाता है, वहाँ से मूल मलिक को हटाया जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंग्रेजों के जमाने में भी यह माना जाता था कि प्राकृतिक समुदाय ही इस देश के असली मालिक हैं?
अंग्रेजों ने 1935 में धारा 91 और 92 बनाकर वर्जित क्षेत्र घोषित किए, जहाँ अंग्रेज भी नहीं आ सकते थे।
आज वही क्षेत्र 5वीं और 6ठी अनुसूची में बदल गए हैं। लेकिन क्या मूल मलिक की समस्या दूर हुई? नहीं।
यह लेख उन सभी कानूनों, बलिदानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को समेटे हुए है।
ताकि हर प्राकृतिक समुदाय का इंसान जान सके – उसकी जमीन उससे कोई नहीं छीन सकता।
1.मूल मलिक कौन? अंग्रेजों के समय के कानून – जब गोरे भी मानते थे आदिवासी (मूल निवासी)
1935 का भारत सरकार अधिनियम – धारा 91 और 92
देश आज़ाद होने से पहले, 1935 में अंग्रेजों ने एक कानून बनाया।
धारा 91 के तहत “वर्जित क्षेत्र” (Excluded Areas) बनाए गए।
यानी ऐसे इलाके जहाँ अंग्रेजी कानून लागू नहीं होते थे।
धारा 92 में “आंशिक रूप से वर्जित क्षेत्र” बनाए।
क्यों? क्योंकि अंग्रेज भी जानते थे कि मूल मलिक कौन? प्राकृतिक समुदाय (Adivasi) ही इस देश के मूल निवासी हैं।
और उनकी जमीन पर पहला हक उन्हीं का है।
बाद में यही वर्जित क्षेत्र संविधान की 5वीं और 6ठी अनुसूची में बदल गए।
क्या 5वीं और 6ठी अनुसूची आने से समस्या दूर हुई?
नहीं। कानून भले ही बन गए, लेकिन आज भी हालात वही हैं।
विकास के नाम पर, खनिजों के लिए, डैम के लिए – आदिवासी की जमीन छीनी जा रही है।
बस फर्क इतना है कि पहले अंग्रेज सीधे नहीं आते थे।
आज सरकारी योजनाओं के नाम पर कब्जा हो रहा है।
पूरा लेख पढ़ें: 5वीं और 6ठी अनुसूची का सच – AdivasiLaw.in
2.जब बलिदानों से बने कानून – बिरसा मुंडा, टंट्या भील और CNT/SPT एक्ट
बिरसा मुंडा – धरती आबा का बलिदान
बिरसा मुंडा ने देखा कि अंग्रेज(मूल मलिक कौन) और जमींदार आदिवासियों की जमीन कैसे हड़प रहे हैं।
उन्होंने उलगुलान (विद्रोह) किया।
1900 में वे शहीद हो गए।
लेकिन उनके बलिदान के बाद ही अंग्रेजों को एहसास हुआ कि सख्त कानून चाहिए।
टंट्या भील – आदिवासी गौरव के महानायक
टंट्या भील ने मध्य भारत में अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ी।
उनका आंदोलन भी जमीन और जंगल के अधिकारों के लिए था।
उन्होंने अपने प्राकृतिक समुदाय (कबीला) को संगठित किया।
और अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए।
सिदो-कान्हू और गोविंद गुरु – भूल नहीं सकते
सिदो-कान्हू मुर्मू ने 1855 में संथाल विद्रोह किया।
उनके बलिदान के बाद ही SPT एक्ट 1949 बना।
गोविंद गुरु ने बांसवाड़ा (राजस्थान) में भीलों को संगठित किया।
सबका एक ही नारा था – “जमीन हमारी, जंगल हमारा, पानी हमारा।”
इन बलिदानों के बाद बने – CNT और SPT एक्ट
एक्ट साल क्षेत्र मुख्य बात
CNT 1908 झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ जमीन गैर-हस्तांतरणीय
SPT 1949 झारखंड (संथाल परगना) बिना अनुमति जमीन न बेचें
आज क्या परिणाम है?
CNT/SPT होने के बावजूद, सरकारी योजनाओं के नाम पर जमीन ली जा रही है।
माइनिंग और इंडस्ट्री के नाम पर विस्थापन जारी है।
क्योंकि कानूनों को तोड़ना सीख लिया गया है।
📊 जमीन रक्षा का पूरा कानूनी हथियार – एक नजर में
| कानून / अनुच्छेद / अधिनियम | क्या सुरक्षा देता है? | ग्राम सभा / समुदाय की क्या भूमिका? | कब इस्तेमाल करें? |
|---|---|---|---|
| अनुच्छेद 13(3) | रूढ़ि प्रथा (Customary Law) को कानूनी मान्यता | ग्राम सभा के पारंपरिक फैसले अदालत में मान्य | जब सरकार आपके गाँव के पुराने नियमों को नकारे |
| अनुच्छेद 19(5) | आदिवासी हितों के लिए जमीन पर उचित प्रतिबंध लगा सकते हैं | ग्राम सभा की सिफारिश से प्रतिबंध लग सकता है | जब बाहरी लोग जमीन खरीदने/कब्जे की कोशिश करें |
| अनुच्छेद 19(6) | प्राकृतिक समुदाय के लिए विशेष प्रावधान | ग्राम सभा विशेष प्रावधानों की मांग कर सकती है | जब आदिवासी क्षेत्रों में विशेष नियम बनें |
| अनुच्छेद 244 | 5वीं और 6ठी अनुसूची लागू करता है | 5वीं में राज्यपाल, 6ठी में जिला परिषद | जब आपका इलाका अनुसूचित क्षेत्र हो |
| PESA Act 1996 | ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य | ग्राम सभा की ‘ना’ = विस्थापन रोक | जब खनन, डैम, इंडस्ट्री के लिए जमीन ली जाए |
| Forest Rights Act (FRA) 2006 | जंगल की जमीन पर कब्जा वैध (75 साल/3 पीढ़ी) | ग्राम सभा FRA पट्टा देने/मंजूर करने वाली संस्था | जब जंगल से हटाने का नोटिस मिले |
| CNT/SPT Act | जमीन गैर-हस्तांतरणीय (Non-transferable) | उपायुक्त की अनुमति, लेकिन ग्राम सभा की राय भी जरूरी | झारखंड/आसपास में जमीन बेचने/गिरवी रखने से रोकने के लिए |
3.आजादी के बाद आदिवासियों (मूल निवासी) के साथ कैसा व्यवहार?
आजादी के 75 साल बाद भी पूछो तो:मूल मलिक कौन?
· गरीबी – आदिवासी बहुल इलाके सबसे गरीब हैं।
· लाचारी – अपनी जमीन से बेदखल होने पर भी कुछ नहीं कर पाते।
· अनपढ़ – सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट की फीस नहीं भर सकते।
· विकास का अभाव – सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल – सबसे दूर।
बड़े-बड़े सपने दिखाए जाते हैं, मिलता क्या है?
· डैम बनेंगे → बिजली आएगी → आपकी जमीन डूबेगी।
· माइनिंग होगी → विकास होगा → आपका जंगल उजड़ेगा।
· इंडस्ट्री लगेगी → रोजगार मिलेगा → आपका गाँव खाली करवाया जाएगा।
हर बार ‘विकास’ के नाम पर सबसे पहले कुर्बानी आदिवासी की जमीन की होती है।
📊 विस्थापन की स्थिति में 7-स्टेप एक्शन प्लान
| कदम | क्या करें? | कितने दिन में? | कहाँ करें? |
|---|---|---|---|
| 1 | ग्राम सभा बुलाएँ (लिखित नोटिस दें) | तुरंत (24 घंटे में) | गाँव के सार्वजनिक स्थान |
| 2 | लिखित विरोध दर्ज कराएँ | ग्राम सभा के अगले दिन | सरपंच, तहसीलदार, एसडीएम |
| 3 | पुराने दस्तावेज (नक्शा, लगान रसीद) इकट्ठा करें | 7 दिन के अंदर | अपने घर / पुराने रिकॉर्ड से |
| 4 | आरटीआई (RTI) लगाएँ | 10 दिन के अंदर | तहसील या जिला सूचना अधिकारी |
| 5 | राज्यपाल (5वीं) या जिला परिषद (6ठी) को शिकायत | 15 दिन के अंदर | संबंधित कार्यालय |
| 6 | हाईकोर्ट में याचिका दायर करें | 30 दिन के अंदर | संबंधित राज्य का हाईकोर्ट |
| 7 | मीडिया और मानवाधिकार आयोग में शिकायत | 15 दिन के अंदर | स्थानीय अखबार / NHRC |
4.राहुल गांधी ने भी माना – आदिवासी भारत के असली मालिक
हाल ही में वडोदरा (गुजरात) में ‘आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन’ हुआ।
वहाँ राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा: मूल मलिक कौन?
“आदिवासी ही भारत के असली मालिक (Real Owners) हैं।”
उन्होंने कहा – ‘वनवासी’ कहना एक साजिश है।
ताकि जंगल कटते ही आपको बेदखल कर दिया जाए।
‘आदिवासी’ का मतलब है – ‘ओरिजिनल मालिक’।
जिनके पास हजारों साल पहले पूरी जमीन थी।
क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयान है? नहीं।
5 जनवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने Kailas vs State of Maharashtra के फैसले में भी यही कहा था।
“आदिवासी ही इस देश के असली वंशज और मूल निवासी हैं।”
पूरा विवरण और कानूनी सच्चाई यहाँ पढ़ें:
👉 राहुल गांधी का बयान, मूल मलिक कौन? आदिवासी भारत के असली मालिक’ – पूरा सच
5.संविधान में आदिवासियों (प्राकृतिक समुदाय) के लिए क्या है?
अनुच्छेद 244 – 5वीं और 6ठी अनुसूची
अनुच्छेद 244 सीधे तौर पर 5वीं और 6ठी अनुसूची को लागू करता है।
यह संविधान का वह दरवाजा है जिसके अंदर पूरा सुरक्षा कवच रखा है।
अनुच्छेद 13(3) – रूढ़ि प्रथा और ग्राम सभा
(Customary Law) को कानूनी मान्यता मिलती है।
आपकी पारंपरिक ग्राम सभा के फैसले अदालत में भी मान्य हैं।
पूरा लेख पढ़ें: अनुच्छेद 13(3) की शक्ति – AdivasiLaw.in
अनुच्छेद 19(5) और 19(6)
बहुत से लोग कहते हैं कि जमीन पर रोक लगाना अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है।
लेकिन अनुच्छेद 19(5) कहता है – आदिवासी हितों की रक्षा के लिए जमीन पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 19(6) कहता है – प्राकृतिक समुदाय के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: अनुच्छेद 19(5) और 19(6) – AdivasiLaw.in
अनुच्छेद 366 – अनुसूचित जनजाति बनाम आदिवासी
अनुच्छेद 366(25) के तहत ST को परिभाषित किया गया है।
लेकिन आदिवासी (Indigenous People) एक व्यापक, अधिक मौलिक पहचान है।
पूरा लेख पढ़ें: अनुच्छेद 366 – ST vs आदिवासी – AdivasiLaw.in
अनुच्छेद 371 और 372
अनुच्छेद 371 – पूर्वोत्तर राज्यों (6ठी अनुसूची) को विशेष अधिकार देता है।
अनुच्छेद 372 – अंग्रेजों के जमाने के कानूनों (1935 के 91-92, CNT/SPT) को जारी रखता है।

6.सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक जजमेंट – जो आदिवासी की जीत हैं
समता जजमेंट (Samatha vs State of AP, 1997)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा – “5वीं अनुसूची के क्षेत्रों में खनन के लिए जमीन का हस्तांतरण पूरी तरह अवैध है।”
“ग्राम सभा की अनुमति के बिना एक इंच जमीन भी नहीं ली जा सकती।”
यह फैसला हर मूल निवासी के लिए ढाल है।
अन्य महत्वपूर्ण जजमेंट
जजमेंट साल क्या कहा?
Orissa Mining Corp vs MOEF 2013 PESA के तहत ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य
State of MP vs Kunjilal 2019 5वीं अनुसूची में बिना ग्राम सभा के विस्थापन शून्य
State of Jharkhand vs Bhumij 2022 CNT/SPT, अनुच्छेद 19 से ऊपर
Patiram vs Union of India 2021 6ठी अनुसूची में जिला परिषद की अनुमति अनिवार्य
Wildlife vs MoEF 2019 FRA पट्टा वालों को जंगल से नहीं हटा सकते
📊 सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट – आदिवासी की जीत का इतिहास
| जजमेंट का नाम | साल | क्या कहा? | आपके लिए क्या मतलब? |
|---|---|---|---|
| Samatha vs State of AP | 1997 | 5वीं अनुसूची में खनन के लिए जमीन हस्तांतरण अवैध | कोई कंपनी आपकी जमीन पर खनन नहीं कर सकती |
| Kailas vs State of Maharashtra | 2011 | आदिवासी ही भारत के असली वंशज और मूल निवासी | आपकी पहचान कानूनी रूप से मान्य |
| Orissa Mining Corp vs MOEF | 2013 | PESA के तहत ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य | बिना आपकी ग्राम सभा की हाँ के कुछ नहीं हो सकता |
| Wildlife vs MoEF (FRA Case) | 2019 | FRA पट्टा वालों को जंगल से नहीं हटा सकते | आपका वन अधिकार पट्टा आपकी ढाल है |
| State of MP vs Kunjilal | 2019 | 5वीं अनुसूची में बिना ग्राम सभा के विस्थापन शून्य | अगर विस्थापन हो रहा है – तुरंत कोर्ट जाएं |
| Patiram vs Union of India | 2021 | 6ठी अनुसूची में जिला परिषद की अनुमति अनिवार्य | पूर्वोत्तर में बिना परिषद के कुछ नहीं होगा |
| State of Jharkhand vs Bhumij | 2022 | CNT/SPT, अनुच्छेद 19 से ऊपर | झारखंड में जमीन बेचना/गिरवी रखना मुश्किल |
7.PESA Act 1996 – ग्राम सभा की वीटो पावर
PESA का पूरा नाम – पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम, 1996।
PESA की 3 सबसे ताकतवर धाराएं
धारा प्रावधान
4(i) ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य
4(d) खनिज, उद्योग के लिए जमीन नहीं ली जा सकती
4(k) विस्थापन पर रोक का अधिकार सिर्फ ग्राम सभा
📊 ग्राम सभा की अनुमति – कब, कैसे, क्यों जरूरी?
| स्थिति / प्रोजेक्ट | ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य? | कानून का आधार | अगर अनुमति न मिले तो क्या होगा? |
|---|---|---|---|
| खनन (Mining) | हाँ, बिल्कुल अनिवार्य | PESA धारा 4(d) + समता जजमेंट (1997) | अधिग्रहण शून्य, कंपनी को हटाना होगा |
| डैम / बांध | हाँ, पूर्व सहमति जरूरी | PESA धारा 4(i) | विस्थापन गैरकानूनी, मुआवजा + पुनर्वास देना होगा |
| इंडस्ट्री / फैक्ट्री | हाँ, बिना अनुमति नहीं | PESA धारा 4(k) | जमीन पर कब्जा अवैध, कोर्ट जा सकते हैं |
| जंगल काटना (Deforestation) | हाँ, ग्राम सभा की सहमति जरूरी | FRA + सुप्रीम कोर्ट (Wildlife vs MoEF, 2019) | वन विभाग को परमिट रद्द करना पड़ेगा |
| रेलवे / हाईवे | हाँ, लेकिन सरकार अक्सर बायपास करती है | भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 (सामाजिक प्रभाव आकलन जरूरी) | याचिका दायर करें – बिना SIA और ग्राम सभा के अधिग्रहण शून्य |
| ST का दर्जा बदलना | नहीं, लेकिन राय जरूरी है | अनुच्छेद 342 | राज्यपाल / राष्ट्रपति से शिकायत |
8.अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 – जंगल के मूल निवासी का हक
किसे मिल सकता है वन अधिकार पट्टा?
जो 75 साल (3 पीढ़ी) से जंगल की जमीन पर खेती/निवास कर रहे हैं।
· जो 13 दिसंबर 2005 से पहले से वहाँ रह रहे हैं।
पूरा लेख पढ़ें: वन अधिकार पट्टा कैसे बनवाएं – AdivasiLaw.in
9.ST प्रमाण पत्र – कानूनी पहचान का पहला दरवाजा
अगर आप ST प्रमाण पत्र नहीं बनवाते, तो 5वीं अनुसूची, PESA, FRA जैसे सभी कानूनों का लाभ नहीं उठा सकते।
पूरा लेख पढ़ें: ST Certificate कैसे बनाएं – AdivasiLaw.in
10.आज आप (मूल मलिक) क्या कर सकते हैं? – 7 कदम
- ग्राम सभा बुलाएं – PESA के तहत आपका यह अधिकार है।
- पुराने दस्तावेज खोजें – 1950 से पहले के नक्शे, लगान रसीद, फर्द।
- लिखित विरोध दर्ज कराएं – सरपंच, तहसीलदार, एसडीएम को।
- आरटीआई लगाएं – पूछें कि आपकी जमीन पर किस योजना से कब्जा हो रहा है?
- जिला परिषद (6ठी अनुसूची) या राज्यपाल (5वीं अनुसूची) को शिकायत करें।
- हाईकोर्ट में याचिका दायर करें – बिना ग्राम सभा की सहमति के अधिग्रहण शून्य है।
- हमारी अन्य गाइड पढ़ें और शेयर करें – AdivasiLaw.in
निष्कर्ष – यह लेख हर मूल मलिक के लिए हथियार है
प्राकृतिक समुदाय मूल मलिक कौन? (Indigenous People, Adivasi, Tribals) ही इस देश के मूल निवासी और मूल मलिक हैं।
अंग्रेजों के जमाने से लेकर आज तक, कानून आपके पक्ष में हैं।
1935 के 91-92, 5वीं-6ठी अनुसूची, PESA, CNT/SPT, FRA – सब कुछ।
सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट भी आपके साथ हैं।
राहुल गांधी से लेकर संविधान तक – सब मानते हैं कि आप ही असली मालिक हैं।
सिर्फ एक कमी है – जागरूकता की।
यह लेख आपके हाथ में हथियार है।
इसे हर उस मूल निवासी तक पहुँचाइए जिसकी जमीन छीनी जा रही है।
इस संघर्ष में आदिवासी समुदाय अपनी जमीन, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा है। हम सभी को इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होना होगा – क्योंकि मूल मलिक वही है, जिसकी जड़ें इस माटी में सदियों से हैं।
जय जोहार!
📌 ये भी पढ़ें – आपकी जमीन और हक से जुड़ी हर जरूरी बात
🌳 वन अधिकार पट्टा कैसे बनवाएं – 2026
जंगल की जमीन पर अगर आप 75 साल या तीन पीढ़ी से रह रहे हैं, तो यह पट्टा आपका हक है। इसे बनवाने की पूरी प्रक्रिया यहाँ समझाई गई है।
👉 वन अधिकार पट्टा गाइड पढ़ें
🪪 ST Certificate कैसे बनाएं – 2026
बिना एसटी प्रमाण पत्र के आप 5वीं अनुसूची, पेसा, वन अधिकार जैसे सभी कानूनों का फायदा नहीं उठा सकते। यहाँ जानें कैसे बनवाएं।
👉 एसटी सर्टिफिकेट गाइड पढ़ें
📜 अनुच्छेद 366 – अनुसूचित जनजाति vs आदिवासी
क्या आप जानते हैं कि ‘अनुसूचित जनजाति’ और ‘आदिवासी’ में कानूनी फर्क है? यह लेख पूरा सच बताता है।
👉 अनुच्छेद 366 समझें
⚖️ अनुच्छेद 19(5) और 19(6) – कानूनी समझ
बहुत से लोग कहते हैं कि जमीन पर रोक लगाना आज़ादी का उल्लंघन है। ये दोनों अनुच्छेद बताते हैं कि आदिवासियों के हितों के लिए ऐसा क्यों जरूरी है।
👉 अनुच्छेद 19(5)(6) पढ़ें
🏛️ अनुच्छेद 13(3) की शक्ति – आदिवासी रूढ़ि प्रथा
आपकी ग्राम सभा के पुराने नियमों को कानूनी मान्यता मिलती है। जानें कैसे यह अनुच्छेद आपका सबसे बड़ा हथियार है।
👉 अनुच्छेद 13(3) की ताकत पढ़ें
🗺️ 5वीं और 6ठी अनुसूची का सच
यही वो दो अनुसूचियाँ हैं जो अंग्रेजों के जमाने के वर्जित क्षेत्रों को आज भी सुरक्षा देती हैं। पूरा सच यहाँ है।
👉 5वीं-6ठी अनुसूची पढ़ें
🎤 राहुल गांधी का बयान – आदिवासी भारत के असली मालिक
वडोदरा सम्मेलन में राहुल गांधी ने क्या कहा? और सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में क्या फैसला दिया? यह लेख पूरी सच्चाई बताता है।
👉 राहुल गांधी का पूरा बयान पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पढ़ने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 की पूरी जानकारी जनजातीय कार्य मंत्रालय की आधिकारिक साइट पर उपलब्ध है।
PESA Act 1996 के बारे में विस्तार से पंचायती राज मंत्रालय की ग्राम सभा गाइड पढ़ें।
पंचायती राज मंत्रालय – ग्राम सभा गाइड– आदिवासीLaw.in – आदिवासी प्राकृतिक समुदाय का डिजिटल हब