ADIVASI LAW

रूढ़ि प्रथा, पारंपरिक ग्राम सभा 13,3(क)

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रूढ़ि प्रथा, पारंपरिक ग्राम सभा 13,3(क)

UncategorizedArticle 244: 5वीं और 6वीं अनुसूची (Constitutional Shield)

आदिवासी सुरक्षा कवच: 5th और 6th Schedule के तहत Article 244(1) & (2) का सच

प्रस्तावना (Introduction):
भारतीय संविधान (Constitution of India) आदिवासियों के जल-जंगल-ज़मीन और उनकी विशिष्ट संस्कृति की रक्षा के लिए एक विशेष प्रशासनिक ढांचा (Administrative Framework) प्रदान करता है। इसे समझने के लिए हमें 5th Schedule और 6th Schedule के कानूनी प्रावधानों को बारीकी से देखना होगा।
​1. 5th Schedule और Article 244(1) का संवैधानिक आधार:
भारत के 10 राज्यों में फैले Scheduled Areas (अनुसूचित क्षेत्रों) के लिए Article 244(1) एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
​यहाँ राज्यपाल (Governor) के पास यह Plenary Power (पूर्ण शक्ति) होती है कि वह किसी भी केंद्रीय या राज्य के Act (अधिनियम) को Notification (अधिसूचना) के माध्यम से आपके क्षेत्र में प्रतिबंधित या संशोधित कर सके।
​यहाँ मुख्य उद्देश्य आपकी Customary Laws (रूढ़िगत कानूनों) को बाहरी हस्तक्षेप से बचाना है।
​2. 6th Schedule और Article 244(2) की स्वायत्तता (Autonomy):
पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम) के Tribal Areas के लिए Article 244(2) का प्रावधान है।
​इसके तहत Autonomous District Councils (ADC) का गठन किया जाता है, जिन्हें कानून बनाने की विधायी (Legislative) और न्यायिक (Judicial) शक्तियां प्राप्त होती हैं। यह व्यवस्था स्वशासन (Self-rule) का सबसे सशक्त उदाहरण है।
​3. Article 244A: एक विशेष उपबंध:
संविधान का Article 244A संसद को यह अधिकार देता है कि वह कुछ क्षेत्रों में एक ‘स्वायत्त राज्य’ (Autonomous State) जैसी व्यवस्था का निर्माण कर सके, जो शासन के विकेंद्रीकरण की पराकाष्ठा है।
​⚖️ कानूनी निष्कर्ष (Legal Conclusion) और 243-M का मेल:
​इन सभी प्रावधानों का निचोड़ हमें Article 243-M में मिलता है। चूंकि 5th और 6th Schedule ने अनुसूचित क्षेत्रों को एक Special Status (विशेष दर्जा) दिया है, इसी कारण संविधान ने Article 243-M के जरिए सामान्य पंचायत व्यवस्था (Part IX) को यहाँ लागू होने से रोका।
​Final Take: यह स्पष्ट है कि जब तक राज्यपाल की Notification आपकी परंपराओं और Traditional Gram Sabha के अनुकूल न हो, तब तक कोई भी बाहरी Act आपकी सीमा में दखल नहीं दे सकता। यही वह ‘संवैधानिक ढाल’ है जो आपके पुरखों के कानूनों को आज भी जीवंत रखती है।

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जोहार! मैं आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, रूढ़ि प्रथा और पारंपरिक ग्राम सभा की रक्षा के लिए समर्पित हूँ। adivasilaw.in के माध्यम से मेरा लक्ष्य हर गांव तक अनुच्छेद 13,3(क), 244(1) और PESA एक्ट की सही जानकारी पहुँचाना है ताकि हमारी ग्राम सभा सशक्त और स्वायत्त बनी रहे।"