अनुच्छेद 243-M – वह सुरक्षा कवच जो पंचायत को आपके इलाके से रोकता है!

जोहार साथियों!
अक्सर हम ‘पंचायत’ और ‘पारंपरिक ग्राम सभा’ को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन भारतीय संविधान में इनके बीच एक बहुत बड़ी दीवार खड़ी है। वह दीवार है अनुच्छेद 243-M।अनुच्छेद 243-M क्या है?यह वह अनुच्छेद है जो साफ़ कहता है कि संविधान का ‘पंचायत’ वाला भाग (Part IX) अनुसूचित क्षेत्रों में सीधे लागू नहीं होगा। इसी 243-M की वजह से सरकार आपके पुरखों के कानून और रूढ़ि प्रथा में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।मुख्य बातें जो हर आदिवासी को जाननी चाहिए:पंचायत बनाम ग्राम सभा: पंचायत एक सरकारी ढांचा है, जबकि ग्राम सभा आपकी प्राकृतिक और पारंपरिक व्यवस्था है।PESA एक्ट का जन्म: क्योंकि 243-M ने पंचायत को हमारे क्षेत्रों में आने से रोका, इसीलिए संसद को मजबूरन PESA एक्ट (1996) बनाना पड़ा ताकि हमारी रूढ़ि प्रथा को कानूनी मान्यता मिले।आपका ढाल: अनुच्छेद 243-M आपको वह ताकत देता है जिससे आप कह सकें कि सरकारी पंचायत आपके पूर्वजों के ‘Customary Law’ (रूढ़ि प्रथा) में दखल नहीं दे सकती।
निष्कर्ष:हमारी ग्राम सभा सरकारी पंचायत की गुलाम नहीं है, वह स्वायत्त है!
